सिंगरौली। धान उपार्जन में परिवहनकर्ता ने किया घोटाला

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नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबधंक का मिला संरक्षण, किसान भुगतान को लेकर दर दर की खा रहे हैं ठोकरें
कलेक्टर ने दोषीयों पर कार्यवाही करने का दिए थे निर्देश,अभी तक नहीं हुई कार्यवाही
प्रदेश भर में किसानों के हित का ढिंढोरा पिट रही सरकार के सपने को पैरों तले रौंदते हुए कुछ सरकारी कर्मचारियों की वजह से ग़रीब किसान अपने पैसे के लिए दर दर की ठोंकरें खाने को मजबूर है।
मिली जानकारी के अनुसार धान उपार्जन वर्ष 2017-18 में हुई धान खरीदी में करीबन 560 क्विंटल धान के घोटाले का मामला प्रकाश में आया है।
जहाँ सेवा सहकारी समिति कर्सुआराजा में कुल धान खरीदी कि मात्रा 27360.00 क्विंटल हुई थी जिसमें से परिवहनकर्ता वीरेंद्र सिंह चंदेल द्वारा 560.00 क्विंटल धान को कर्सुआराजा समिति से उठाकर परिवहन करने के लिए ले जाया गया लेक़िन उपार्जन गोदाम तक उपार्जित मात्रा नहीं पहुंचाई गई जिससे आज तक किसानों द्वारा बेचे गए धान का भुगतान नहीं हो पा रहा है जिससे किसान अपने पैसे को लेकर दर दर की ठोंकरें खाने को मजबूर है।
ना.आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक का मिला संरक्षण,नहीं हो रहा किसानों का भुगतान
प्राप्त जानकारी के अनुसार परिवहनकर्ता वीरेंद्र सिंह चंदेल द्वारा धान उपार्जन में किये गए गोलमाल को लेकर हुई जाँच में जांचकर्ताओं ने समिति के पक्ष में फैसला दिया था लेक़िन आजतक  किसानों का भुगतान जिला प्रबंधक द्वारा नहीं कराया गया जिससे साफ़ जाहिर होता है कि कहीं कहीं जिला प्रबधंक ने परिवहनकर्ता को खुला संरक्षण दे रखा है जिससे किसान अपने खून पसीने की कमाई के लिए दर दर की ठोंकरें खा रहा है।
कार्यवाही के हुए थे आदेश,अभी तक नहीं हुई कोई कार्यवाही
सूत्रों की मानें तो धान उपार्जन में हुए घोटाले की जांच को लेकर कलेक्टर अनुराग चौधरी ने दोषी पर कार्यवाही करने का आदेश दिया था लेक़िन आज तक न ही कार्यवाही हुई और न ही किसानों का भुगतान।
सैकड़ों किसानों की खून पसीने की कमाई को एक ही झटके में रफूचक्कर कर परिवहनकर्ता वीरेंद्र सिंह चंदेल एक ओर अपनी छवि को बचाने में लगे हैं तो दूसरी ओर जिला कलेक्टर के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे ना. आ.निगम के जिला प्रबधंक उन पर कार्यवाही करने के बजाय उन्हें खुला संरक्षण देते नज़र आ रहे हैं।

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